अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। हर साल सर्दियों के आगमन के साथ बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है। जहां एक तरफ इससे फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ दिल और दिमाग पर भी इसका खतरा बढ़ता ही जा रहा है।
दरअसल, हवा में मौजूद पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंचते हैं। अति सूक्ष्म कण रक्त प्रवाह में प्रवेश कर शरीर में सूजन और ऑक्सीकरण संबंधी तनाव बढ़ा सकते हैं।
इससे रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और हृदय रोग, हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। एम्स पल्मोनरी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. डॉ. जीसी खिलनानी और वर्तमान प्रमुख प्रो. डॉ. अनंत मोहन ने भी प्रदूषण के व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है।
दिल, दिमाग व दूसरे अंगों तक पहुंच रहा प्रदूषण
प्रो. डॉ. जीसी खिलनानी के अनुसार अति सूक्ष्म प्रदूषक कण फेफड़ों में पहुंचने के बाद रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंच रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव हृदय, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे और पाचन तंत्र पर पड़ रहा है। इसके साथ अस्थमा, सीओपीडी और हार्ट अटैक के लिए अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
बढ़ता प्रदूषण आपात स्थिति
एम्स के पल्मोनरी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. अनंत मोहन का कहना है कि प्रदूषण से हृदय, मस्तिष्क के साथ शरीर की दूसरी कार्यप्रणालियां भी प्रभावित हो रही हैं। पिछले वर्ष दीपावली के बाद सांस की दिक्कतों के मरीजों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के एम्स, सफदरजंग, डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज समूह, राष्ट्रीय क्षय रोग एवं श्वसन रोग संस्थान और वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में वर्ष 2022 से 2024 के बीच सांस की गंभीर बीमारियों के 204758 से अधिक मरीज इमरजेंसी में पहुंचे थे।