यूं तो टीन एजर्स से लेकर महिलाओं तक में गोरी दिखने की चाह आम है। लेकिन रूप चौदस से लेकर दीपावली तक ये चाहत कुछ ज्यादा बढ़ जाती है।

वे इसके लिए फेशियल से लेकर फेयरनेस क्रीम तक का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन जिस क्रीम को गोरा दिखने के लिए चेहरे पर लगाया जा रहा है, वही किडनी को नुकसान पहुंचाने लगे तो क्या कहेंगे?

जी हां! पाकिस्तान में बनी 'गोरी ब्यूटी क्रीम' से यही हो रहा है। महाराष्ट्र के नागपुर में इस क्रीम का इस्तेमाल करने वाली करीब 18 महिलाओं में किडनी की बीमारी के मामले सामने आए।

डॉक्टरों ने क्रीम के एक सैंपल की जांच कराई तो उसमें 5700 PPM तक मर्करी यानी पारा मिला। कॉस्मेटिक्स में इसकी अधिकतम तय सीमा 1 PPM है।

इसके बाद महाराष्ट्र FDA ने राज्य में गोरी क्रीम पर बैन लगा दिया। लेकिन मध्य प्रदेश में ये क्रीम आसानी से बिक रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इसकी लिस्टिंग मिली।


1. दुकान में नहीं रखते, 10 मिनट में मंगवा देंगे

बुधवारा की एक कॉस्मेटिक दुकान पर टीम ग्राहक बनकर पहुंची और गोरी क्रीम के बारे में पूछा। दुकानदार ने कहा कि वह इसे दुकान में नहीं रखता, लेकिन ग्राहक को जरूरत हो तो 10 मिनट में मंगवाकर दे सकता है।

दुकान के गल्ले में क्रीम का एक डिब्बा भी रखा था। दुकानदार उसे खराब बता रहा था, लेकिन सैंपल के तौर पर अपने पास रखने की बात कही।

पैकेजिंग पर 'मेड इन पाकिस्तान' लिखा था। कीमत पूछने पर दुकानदार ने कहा कि पहले यह तय करें कि कितनी क्रीम खरीदनी है, फिर उसी हिसाब से दाम तय करेंगे।

पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग डेट भी नहीं मिली। दुकानदार ने दावा किया कि क्रीम खोलने के बाद तीन साल तक इस्तेमाल की जा सकती है।


2. पहले हटाया पाकिस्तान का पैकेट, फिर दिखाई क्रीम

बुधवारा की दूसरी दुकान पर टीम क्रीम खरीदने पहुंची तो दुकानदार ने सबसे पहले क्रीम के ऊपर लगा 'मेड इन पाकिस्तान' वाला पैकेट हटाया। इसके बाद सफेद क्रीम दिखाई।

बाहरी पैकेजिंग पर भी पाकिस्तान में बने होने का उल्लेख था। दुकानदार ने इसकी कीमत 400 रुपए बताई। इसी दौरान दुकान पर मौजूद एक महिला ग्राहक गोरी क्रीम के साथ उसी ब्रांड का साबुन खरीदने के लिए भी तैयार थी।

3. गोरी नहीं तो उससे मिलती-जुलती दूसरी क्रीम

अशोका गार्डन की दुकान पर गोरी क्रीम के बारे में पूछने पर दुकानदार ने 'पंचवटी हर्ब्स' नाम की दूसरी क्रीम दिखाई। इसकी पैकेजिंग गोरी क्रीम जैसी थी।

दुकानदार ने 500 रुपए MRP वाली क्रीम 280 रुपए में देने की बात कही। उसने बताया कि उसे यह प्रोडक्ट होलसेल में 279 रुपए का पड़ा है।

इटवारा में भी ADS ब्रांड की ऐसी ही क्रीम मिली। दुकानदार ने गोरी क्रीम के बारे में पूछने पर कहा, 'मैडम, आप गोरी को भूल जाओ, ये क्रीम अब मार्केट में बिक रही है।'


क्रीम में मर्करी क्यों मिलाया जाता है?

मर्करी त्वचा में मेलेनिन बनने की प्रक्रिया को रोकता है। मेलेनिन त्वचा को प्राकृतिक रंग देता है और सूरज की हानिकारक UV किरणों से बचाने में भी मदद करता है।

इसका बनना कम होने से त्वचा हल्की दिखाई देने लगती है और काले धब्बे कम नजर आ सकते हैं। इसी वजह से कुछ फेयरनेस क्रीम में मर्करी का इस्तेमाल किया जाता है।

पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अनिमेश सक्सेना के मुताबिक, मर्करी वाली क्रीम किडनी और लिवर जैसे अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लगातार इस्तेमाल से त्वचा पर भी असर पड़ सकता है।

मर्करी की समस्या सिर्फ गोरी क्रीम तक सीमित नहीं है। Zero Mercury Working Group के आंकड़ों में भारतीय उपमहाद्वीप में उपलब्ध कुछ स्किन केयर प्रोडक्ट्स में मर्करी की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा पाई गई।


नागपुर में क्रीम के इस्तेमाल से जुड़ा किडनी का मामला

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नागपुर में किडनी की परेशानी से जूझ रही करीब 18 महिलाओं के गोरी क्रीम के नियमित इस्तेमाल की बात सामने आई। किडनी विशेषज्ञों को 2023-24 से ऐसे मरीज मिल रहे थे।

एक डॉक्टर ने क्रीम का सैंपल निजी लैब में जांच के लिए भेजा। इसमें मर्करी की मात्रा 5700 PPM तक मिली। जबकि ये 1 PPM से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

प्रभावित महिलाओं में से कई को मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी नाम की किडनी की बीमारी थी। इनमें ज्यादातर महिलाएं करीब 20 साल की थीं। मरीजों में चेहरे और शरीर पर सूजन, पैरों में सूजन और यूरिन में झाग आने जैसे लक्षण दिखाई दिए।

IIT हैदराबाद की रिसर्च में भी सामने आया खतरा

साल 2021 में IIT हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स के सैंपल की जांच की थी। इसमें देश में बनी 34 फेयरनेस क्रीम में मर्करी की मात्रा काफी कम मिली।

14 आयातित फेयरनेस क्रीम में इसकी औसत मात्रा 9.24 मिलियन माइक्रोग्राम प्रति किलो पाई गई। यह कॉस्मेटिक्स में तय 1 PPM की सीमा से हजारों गुना ज्यादा थी।

रिसर्च में यह भी सामने आया कि ज्यादा मर्करी वाली क्रीम को त्वचा पर लगाने से शरीर में पारा पहुंचने का जोखिम काफी अधिक था।


आयात पर रोक, फिर भी भारत में कैसे पहुंचीं क्रीम?

भारत सरकार ने 2 मई 2025 को पाकिस्तान में बने या वहां से निर्यात किए गए सभी सामान के सीधे और तीसरे देश के रास्ते आयात तथा ट्रांजिट पर रोक लगा दी थी।

इसके बावजूद सितंबर 2026 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने गोरी ब्यूटी क्रीम और चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम को लेकर पब्लिक हेल्थ अलर्ट जारी किया।

CDSCO के मुताबिक, इन दोनों प्रोडक्ट्स को भारत में बिक्री के लिए जरूरी इंपोर्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं मिला था। जांच में इनमें तय सीमा से ज्यादा हेवी मेटल्स पाए गए।

संगठन ने लोगों को इन क्रीमों को न खरीदने और पहले से इस्तेमाल कर रहे लोगों को इनका इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी। दुकानदारों और दूसरे संस्थानों को इनकी बिक्री, वितरण और विज्ञापन नहीं करने के निर्देश भी दिए गए।

पाकिस्तानी क्रीम भारत कैसे पहुंची?

पाकिस्तान से सामान के आयात पर रोक के बावजूद क्रीमों की उपलब्धता कई सवाल खड़े करती है। इनके भारत पहुंचने के संभावित रास्तों में तीसरे देश के जरिए सप्लाई, पुराने स्टॉक, कूरियर-पार्सल और अनौपचारिक व्यापार शामिल हो सकते हैं।

भारत में दोबारा पैकिंग या भारतीय ब्रांड का लेबल लगाकर बेचे जाने की आशंका भी हो सकती है। हालांकि, ये सिर्फ संभावित रास्ते हैं।

गोरी और चांदनी क्रीम भारत में किस रास्ते से पहुंचीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। तीसरे देश के रास्ते आने से भी पाकिस्तानी मूल के सामान पर लगी आयात की रोक खत्म नहीं होती।

ऑनलाइन भी मिल रही हैं ये क्रीम, कीमत में अंतर

भास्कर की पड़ताल में सिर्फ दुकानों पर ही नहीं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इन क्रीमों की उपलब्धता सामने आई। IMPEXBEAUTY, KartWalk और Healthmug जैसी वेबसाइटों पर गोरी क्रीम की लिस्टिंग मिली।

इन वेबसाइटों पर इसकी कीमत करीब 600 से 700 रुपए के बीच दिखाई दी। वहीं, भोपाल में दुकानदार यही क्रीम करीब 300 से 400 रुपए में बेचने की बात कह रहे थे। यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में इसकी कीमत में भी अंतर देखने को मिला।