‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी कल्ट फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर अनुराग कश्यप अपने करियर की शुरुआत में स्ट्रगल कर रहे थे। इसी दौर में उन्हें एक फिल्म डायरेक्ट करने का मौका मिला। अनुराग इस कहानी को लेकर हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज एक्टर के पास पहुंच गए। कहानी सुनते ही एक्टर की आंखों में काम करने की चमक लौट आई। उन्होंने कहा, “बेटा, बहुत समय हो गया है मेरे मुंह पर मेकअप नहीं लगा। बहुत अच्छी कहानी है तुम्हारी, करते हैं।”
दिग्गज एक्टर के साथ काम करना अनुराग के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था, लेकिन तभी कहानी में एक ट्विस्ट आया। एक्टर के बेटे को पता चला कि फिल्म के आखिर में उसके पिता के किरदार की मौत हो जाती है। उसने तुरंत अपने पिता को फिल्म करने से मना कर दिया।
अनुराग ने जब इसकी वजह पूछी, तो बेटे ने बेझिझक कहा, “Deols don’t die यानी देओल्स नहीं मरते।”
यह एक्टर थे धर्मेंद्र और उन्हें फिल्म करने से रोकने वाले उनके बेटे थे सनी देओल।
बचपन में धर्मेंद्र के को-एक्टर को गोली मारने निकले
साल था 1961 और सनी देओल महज 4 साल के थे। एक दिन उनके घर पर ऐसा शख्स पहुंचा, जिसे देखकर नन्हे सनी को गुस्सा आ गया। उन्होंने एयर गन उठाई और पूरे घर में घूमने लगे।
जब मां प्रकाश कौर ने पूछा कि आखिर वह कर क्या रहे हैं, तो सनी गुस्से में बोले, “मैं इसे गोली मारूंगा। इसने मेरे पापा को मारा था।”
दरअसल, सनी ने अपने पिता धर्मेंद्र की 1961 में आई फिल्म ‘शोला और शबनम’ देखी थी। फिल्म में अभिनेता एम. राजन ने धर्मेंद्र के किरदार के साथ मारपीट की थी। नन्हे सनी के मन में यह बात बैठ गई कि इस शख्स ने उनके पापा को मारा है। उन्हें यह समझ नहीं आया कि पर्दे पर दिखने वाली लड़ाई सिर्फ एक्टिंग थी।
संयोग से कुछ समय बाद एम. राजन असल जिंदगी में धर्मेंद्र से मिलने मुंबई के खार स्थित उनके घर पहुंचे। उन्हें देखते ही सनी को फिल्म वाला वही सीन याद आ गया।
ड्राइवर की गोदी में बैठकर कार चलाते थे
सनी देओल बचपन से ही काफी शरारती थे। उन्हें गाड़ियां चलाने का इतना शौक था कि महज 12-13 साल की उम्र में ही उन्होंने चोरी-छिपे कार चलानी शुरू कर दी थी। शुरुआत में वे ड्राइवर की गोदी में बैठकर भी कार चलाते थे।
सनी ने ‘आप की अदालत’ जैसे कई इंटरव्यू में यह बताया कि जब घर के सभी लोग सो जाते थे, तो वे चुपके से गाड़ी की चाबी उठाते और गाड़ी लेकर निकल जाते थे। इस दौरान उन्होंने कई बार गाड़ियों को टक्कर भी मार दी थी।
मैशेबल इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में सनी ने बताया था कि वह अपनी कार में तलवारें, धातु की छड़ें और हॉकी स्टिक रखते थे।
सनी देओल के पैर में रॉड घुस गई थी
दमदार डायलॉग और एक्शन के लिए मशहूर सनी की असल जिंदगी में भी कई बार लड़ाइयां हुईं। सनी की एक लड़ाई इतनी खतरनाक थी कि वह अकेले कई लोगों से भिड़ गए थे और उन पर रॉड से हमला हुआ था।
सनी ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट पर बताया था कि एक लड़ाई में उनके पैर में रॉड घुस गई थी। यह लड़ाई ईगो की वजह से शुरू हुई थी। उस वक्त वह अकेले लड़ रहे थे, जबकि उनके साथ आए लोग डर के मारे कार में ही बैठे रहे।
सनी ने कहा था कि भगवान की कृपा थी कि उन्हें सिर पर कोई गंभीर चोट नहीं लगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी इस तरह की लड़ाइयों में नहीं पड़ना चाहिए।
अपनी गलती होने पर सनी ने माफी भी मांगी थी
सनी देओल ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट पर स्कूल के दिनों का एक किस्सा बताया था।
उन्होंने बताया कि उस वक्त वह दोस्तों के साथ कार में जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक खूबसूरत लड़की दिखी। सनी ने उसे देखकर कुछ कह दिया। हालांकि, उनका इरादा बदतमीजी करने का नहीं था, बल्कि दोस्तों के साथ मस्ती करने का था।
इसके बाद सनी अपने दोस्त के घर पहुंचे। तभी पीछे से एक कार आई और उनके पास आकर रुक गई। कार से एक लड़का उतरा और सनी से सवाल करने लगा। सनी ने उससे पूछा, ‘तू कौन है?’
इस पर लड़के ने जवाब दिया कि वह उसी लड़की का भाई है, जिसे सनी ने रास्ते में देखकर कुछ कहा था।
सनी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने उस लड़के से कहा, ‘मैं गलत हूं। अगर तू मुझे मारना चाहता है, तो मार ले। मैंने तेरी बहन से कुछ कहा है, तो मेरी गलती है।’
सनी ने कहा कि जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने उसे मानने में देर नहीं की। उनके मुताबिक, वह हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। अगर गलती अपनी है, तो उसे स्वीकार करना चाहिए।
क्रिकेट मैच में हुई लड़ाई, पुलिस सनी को अपने साथ ले गई
फिल्मों में आने से पहले सनी देओल का गुस्सा एक बार क्रिकेट मैच के दौरान फूट पड़ा था। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को बीच में आना पड़ा।
रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट पर सनी ने इस किस्से के बारे में बताया था। दरअसल, सनी 20 साल के आसपास थे। उन्होंने फिल्मों में डेब्यू भी नहीं किया था। एक दिन वे अपने दोस्तों के साथ भारत और न्यूजीलैंड का क्रिकेट मैच देखने पहुंचे।
सनी नॉर्थ स्टैंड में बैठे थे। तभी वहां मौजूद कुछ लोगों को पता चला कि वे धर्मेंद्र के बेटे हैं। इसके बाद लोग उन्हें परेशान करने लगे। बात तब बिगड़ गई, जब कुछ लोगों ने उन पर सिगरेट के टुकड़े फेंकने शुरू कर दिए।
सनी को यह हरकत बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने अपना आपा खो दिया और लोगों से भिड़ गए। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया।
सनी ने बताया था कि उस वक्त उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वे लड़ने लगे। हालात बिगड़ने पर पुलिस वहां पहुंची थी।
इस घटना को याद करते हुए सनी ने कहा था कि जब कोई हद पार कर देता है, तो ऐसी स्थिति बन जाती है।
गुस्से में दबाया अनिल कपूर का गला, अटक गई थीं सांसें
सनी देओल और अनिल कपूर के बीच एक वक्त ऐसा भी आया था, जब दोनों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे।
साल 1988 में आई फिल्म ‘राम अवतार’ की शूटिंग के दौरान एक फाइट सीन में सनी देओल को अनिल कपूर का गला पकड़ना था, लेकिन सीन के दौरान बात इतनी बढ़ गई कि सनी ने अनिल का गला जोर से दबा दिया।
बताया जाता है कि अनिल कपूर की सांसें अटकने लगी थीं। डायरेक्टर के कट बोलने के बाद भी सनी ने तुरंत हाथ नहीं हटाया। ऐसे में सेट पर मौजूद लोगों को बीच में आना पड़ा।
हालांकि, दोनों के बीच तनाव की शुरुआत इससे पहले फिल्म ‘जोशीले’ के दौरान हुई थी। बताया जाता है कि फिल्म के पोस्टर और क्रेडिट्स में अनिल कपूर का नाम सनी देओल से ऊपर रखा गया था। इससे सनी नाराज थे। उन्हें लगता था कि उनके किरदार के बावजूद अनिल को ज्यादा तारीफ मिल रही थी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। ‘राम अवतार’ के बाद दोनों ने 1989 में फिल्म ‘इंतकाम’ में भी साथ काम किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान भी दोनों के बीच एक सीन को लेकर बहस हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ गई और उन्होंने फिर लंबे समय तक साथ काम नहीं किया।
‘घायल’ को प्रोड्यूस करने को कोई तैयार नहीं था
साल 1990 में सनी देओल की एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था ‘घायल’। इस फिल्म ने सनी देओल के करियर को नई पहचान दी। फिल्म का डायलॉग, “बलवंत राय के कुत्तों, सामने आओ!” आज भी लोगों को याद है, लेकिन इस फिल्म को बनाना आसान नहीं था।
दरअसल, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी जब फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर प्रोड्यूसर्स के पास गए, तो किसी ने भी फिल्म बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
इसके बाद थक-हारकर जब सनी देओल और राजकुमार संतोषी ने यह कहानी धर्मेंद्र को सुनाई, तो धर्मेंद्र ने कहानी पर भरोसा जताया और अपने होम प्रोडक्शन हाउस ‘विजयता फिल्म्स’ के बैनर तले इसे खुद प्रोड्यूस करने का फैसला किया।
इसके बाद ‘घायल’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म में सनी देओल की एक्टिंग और उनके अंदाज को खूब पसंद किया गया।
इस फिल्म के लिए सनी देओल को नेशनल फिल्म अवॉर्ड में स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला।
सनी देओल को पाकिस्तानी भी देते हैं खूब प्यार
सनी देओल की फिल्मों में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ने वाले किरदार काफी मशहूर रहे हैं। खासकर ‘गदर’ में तारा सिंह का किरदार आज भी लोगों को याद है।
हालांकि, रियल लाइफ में पाकिस्तान के लोग भी सनी देओल को बहुत प्यार देते हैं।
‘आप की अदालत’ में सनी देओल ने बताया था कि जब भी वे इंग्लैंड या दुबई गए, वहां उन्हें पाकिस्तानी लोग मिले। उन्होंने सनी को खूब प्यार दिया, गले लगाया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। वाघा बॉर्डर पर भी उन्होंने दूसरी तरफ खड़े लोगों को हाथ हिलाते और प्यार जताते देखा था।
सनी ने कहा था कि कलाकार किसी एक देश के लिए नहीं होते, बल्कि सभी के लिए होते हैं। फिल्मों में कहानी के हिसाब से हीरो और विलेन होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी के खिलाफ हैं।
उन्होंने तारा सिंह के किरदार का उदाहरण देते हुए कहा कि तारा सिंह को बस अपने परिवार से मतलब है। वह चाहता है कि उसका परिवार जहां भी रहे, सुरक्षित और खुश रहे। उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका परिवार हिंदुस्तान में रहे या पाकिस्तान में।
गुस्से में खुद की ही जींस फाड़ दी थी
सनी देओल को एक बार इतना गुस्सा आया कि उन्होंने सेट पर अपनी ही जींस फाड़ दी थी।
यह किस्सा साल 1993 में आई फिल्म ‘डर’ की शूटिंग का है। फिल्म में सनी देओल ने एक कमांडो का किरदार निभाया था, जबकि शाहरुख खान विलेन बने थे।
फिल्म के एक सीन को लेकर सनी और डायरेक्टर यश चोपड़ा के बीच सहमति नहीं बन पाई थी।
सीन में शाहरुख का किरदार सनी को चाकू मार देता है। सनी का मानना था कि एक ट्रेंड कमांडो को इतनी आसानी से कोई चाकू कैसे मार सकता है?
लेकिन जब उनकी बात नहीं मानी गई, तो सनी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने अपनी जींस की जेबों में हाथ डालकर इतनी जोर से खींचा कि जींस फट गई। सेट पर मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए थे।