नई दिल्ली: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले का आज 20वां दिन है। यह युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। इस युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में भी तनाव पैदा हो गया है। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं। भारत पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। इस युद्ध ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत (India Inc) के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस युद्ध की वजह से सप्लाई चेन और प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे आने वाले महीनों में कच्चे माल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो जाएंगी।पेट्रोकेमिकल लागत बढ़ने का खतरा
S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के डेटा के मुताबिक इनपुट प्राइस इंडेक्स फरवरी में 15 महीने के उच्च स्तर 54.7 पर पहुंच गया। यह जनवरी में 52.5 और फरवरी में 53.6 था। एचडीएफसी बैंक में प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा कि वे सेक्टर जो पेट्रोलियम और नेचुरल गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, उन पर कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा पड़ेगा।थोक महंगाई में आ सकता है उबाल
कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों का सीधा असर थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर पड़ता है। फरवरी में थोक महंगाई 11 महीने के उच्चतम स्तर (2.13%) पर थी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुताबिक यह मार्च में 3.7% तक पहुंच जाएगी, जो 37 महीने के उच्चतम स्तर पर होगी। फरवरी में कच्चे माल की कीमतों में उछाल आया है। यह इस प्रकार है:
कॉपर रिंग्स: 17.1%
एल्युमिनियम पाउडर: 17.5%
एल्युमिनियम एलॉय: 14.8%
पीतल: 24.1%
PVC इंसुलेटेड केबल: 13.4%
कॉपर वायर: 20.7%