तेल अवीव: इजरायल ने आने वाले दिनों ईरान में हमले तेज करने का ऐलान किया है। इजरायली सेना ने आने वाले तीन हफ्तों में ईरान में करीब एक हजार ठिकानों पर हमला करने की बात कही है। इजरायल ने युद्ध के लिए आपातकालान बजट को मंजूरी दी है ताकि सैन्य साजो-सामान खरीदे जा सकें। इजरायल के इस प्लान से ईरान में युद्ध और तेज होने का अंदेशा पैदा हो गया है। बीते 17 दिनों से चल रही इस लड़ाई में पहले ही जानमाल का भारी नुकसान हुआ है।सीएनएन की रिपोर्ट अनुसार, इजरायली सेना ने ईरान में कम से कम तीन हफ्ते (21 दिन) और हमलों की योजना बनाई है। इस दौरान ईरान में एक हजार से ज्यादा टारगेट को निशाना बनाया जाएगा। साथ ही इजरायल ने सैन्य खरीद के लिए 827 मिलियन डॉलर के आपातकालीन बजट मंजूर किया है। इस रकम से सुरक्षा खरीद और तत्काल जरूरतों के लिए किया जाएगा।इजरायल का एयर डिफेंस मजबूत: सार
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि इजरायली आर्मी ने अमेरिका को मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी होने की जानकारी दी है। सार ने कहा है कि इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम मजबूती से काम कर रहा है और सेना के पास मिसाइल इंटरसेप्टर की कोई कमी नहीं है।
इजरायली मीडिया ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया है कि 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने के बाद से 13 मार्च तक ईरान ने इजरायल पर 250 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। वहीं बड़ी संख्या में ड्रोन भी दागे गए हैं। इजरायली अधिकारियों और आपातकालीन बचाव कर्मियों ने ईरान के हमलों में देशभर में बारह लोगों की मौत की पुष्टि की है।इजरायल-ईरान युद्ध
अमेरिका और इजरायल गठबंधन ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद से लगातार इजरायल और अमेरिका ने ईरान में बमबारी की है। इन हमलों में ईरान में 1300 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसमें एक स्कूल पर हमलें में 160 छोटी बच्चियों की मौत भी शामिल है। ईरान में बड़े पैमाने पर इमारतों और बुनियादे ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमलों का जवाब मिसाइल और ड्रोन हमले से दिया है। ईरान ने इजरायल में लगातार मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, इसमें तेल अवीव और हाइफा जैसे बड़े शहरों में काफी नुकसान हुआ है। ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, यूएई जैसे पड़ोसी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को भी अपने हमलों का निशाना बनाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य भी बंद
ईरान ने अपने ऊपर हमले होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। इस समुद्री गलियारे का इस्तेमाल पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देश करते हैं। इसके बंद होने से भारत समेत दुनिया के बड़े हिस्से में उर्जा संकट पैदा हो रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के प्रायद्वीप के बीच स्थित है। ईरान के हमलों की वजह से इस जलडमरुमध्य में समुद्री यातायात तकरीबन ठप है। डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस समुद्री गलियारे को सुरक्षा देने के दावे किए हैं लेकिन वह इसे सुरक्षित करने में अभी तक नाकाम हैं।