भोपाल में एक महिला से लाखों रुपए और सोने-चांदी के जेवर ठगने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने महिला को पूजा-पाठ से परेशानियां दूर करने और रकम दोगुनी करने का झांसा दिया। इसके बाद उससे बैंक खाते में 7.16 लाख रुपए ट्रांसफर कराए और 12.54 लाख रुपए नकद ले लिए।
आरोपियों ने करीब 625 ग्राम सोने और 500 ग्राम चांदी के आभूषण भी हड़प लिए। मामले में क्राइम ब्रांच ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी आशा यादव, उसका पति हरीश कुमार और उनका परिचित श्यान शामिल हैं।
ग्रह शांति के नाम पर शुरू किया झांसा
पुलिस के मुताबिक, पुरुषोत्तम शर्मा ने जांच के बाद 28 अक्टूबर 2026 को क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आशा यादव और उसके भाई मुकेश ने पुरुषोत्तम शर्मा की पत्नी राजेश्वरी शर्मा को अपने झांसे में लिया था।
आरोपियों ने ग्रह शांति कराने, तंत्र-मंत्र के जरिए परेशानियां दूर करने और पैसों को बढ़ाकर दोगुना करने का भरोसा दिलाया। इसी बहाने महिला से अलग-अलग किस्तों में रकम और कीमती आभूषण लिए गए। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने साजिश के तहत इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
11 ग्राम सोना बरामद, बाकी जेवर गिरवी रखे
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी आशा यादव को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर 11 ग्राम सोना बरामद किया गया।
पूछताछ में सामने आया कि आशा के पति हरीश कुमार और परिचित श्यान ने ठगी के जेवर अलग-अलग गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रखकर उनके बदले लोन ले लिया था। इसके बाद पुलिस ने हरीश कुमार और श्यान को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
कैपरी, आईआईएफएल और मुथूट में रखे जेवर
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने कैपरी बैंक, आईआईएफएल गोल्ड लोन और मुथूट गोल्ड लोन में आभूषण गिरवी रखे हैं।
इन संस्थानों से लोन लेने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अब वहां रखे जेवरों को फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है, ताकि आभूषणों को आगे किसी अन्य व्यक्ति को बेचा या हस्तांतरित न किया जा सके।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर ठगी के बाकी जेवरों की बरामदगी के प्रयास कर रही है। क्राइम ब्रांच में इस मामले में अपराध क्रमांक 135/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या रही और हड़पी गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।